उज्जैन: काल गणना का केंद्र एवं
ग्रह शांति की मोक्षदायिनी भूमि
स्कंद पुराण के अवंती खंड अनुसार उज्जैन को पृथ्वी का नाभिदेश कहा गया है। कर्क रेखा यहीं से गुजरती है और भगवान महाकाल काल के चक्र को नियंत्रित करते हैं।
उज्जैन के प्रमुख पावन तीर्थ
तीर्थ 1: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंगदक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग एवं भस्म आरती
12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग। दक्षिण दिशा यम की मानी जाती है, अतः यहां भगवान शिव काल के भी काल महाकाल बनकर यम और मृत्यु के भय को हर लेते हैं।
तीर्थ 2: श्री अंगारेश्वर मंदिरमंगल ग्रह की जन्मस्थली (मत्स्य पुराण)
भगवान शिव के मस्तक से गिरे पसीने की बूंद से मंगल ग्रह की उत्पत्ति यहीं मानी गई है। यहां ठंडे पके हुए चावलों से 'भात पूजा' कर मंगल के उग्र स्वभाव को शांत किया जाता है।
तीर्थ 3: सिद्धवट तीर्थअमर वटवृक्ष एवं पितृ मोक्ष स्थली
गया, प्रयाग और नासिक के समान सिद्धवट चौथा अक्षय वटवृक्ष है। यहां माता सीता ने राजा दशरथ का पिंडदान किया था। पितृ दोष शांति और नारायण नागबलि हेतु यह सर्वश्रेष्ठ है।
तीर्थ 4: रामघाट (क्षिप्रा तट)अमृत स्नान एवं कालसर्प शांति
समुद्र मंथन के समय अमृत की बूंदें क्षिप्रा के रामघाट पर गिरी थीं। भगवान श्रीराम ने यहां अपने पिता का तर्पण किया था। कालसर्प दोष पूजा हेतु यह मुख्य केंद्र है।
उज्जैन कैसे पहुंचे? (यात्रा मार्गदर्शक)
निकटतम हवाई अड्डा: देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा, इंदौर (उज्जैन से लगभग 55 किमी)। यहां से टैक्सी या बस द्वारा केवल 1 घंटे में उज्जैन पहुंचा जा सकता है।
उज्जैन जंक्शन (UJN) भारत के सभी प्रमुख नगरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, चेन्नई, जयपुर) से सीधी एक्सप्रेस एवं सुपरफास्ट रेल सेवाओं द्वारा जुड़ा है।
इंदौर, भोपाल, रतलाम एवं कोटा से 4-लेन उत्कृष्ट राजमार्ग उपलब्ध हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन एवं निजी एसी बसें निरंतर संचालित होती हैं।