अर्क विवाह एवं कुंभ विवाह उज्जैन
विवाह में अत्यधिक विलंब, वैधव्य योग अथवा प्रबल मांगलिक दोष निवारण हेतु वैदिक प्रतीकात्मक विवाह

सिद्धवट एवं रामघाट तीर्थ, उज्जैन
पूजा का शास्त्रोक्त स्वरूप एवं महत्व
यह पूर्णतः शास्त्रोक्त एवं सम्मानजनक वैदिक प्रक्रिया है। विवाह के सभी आवश्यक मंत्र, फेरे और कन्यादान के संस्कार वैदिक मर्यादा के अनुसार संपन्न होते हैं, जिससे जीवन में भावी दांपत्य सुख में किसी प्रकार की बाधा न आए।
शास्त्रों के अनुसार प्रतीकात्मक विवाह के उपरांत प्रथम विवाह का दोष समाप्त हो जाता है, जिससे वास्तविक वैवाहिक जीवन दीर्घायु, स्थिर एवं सुखमय बनता है।
उज्जैन तीर्थ में ही क्यों?
उज्जैन के सिद्धवट एवं रामघाट पर सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। यहां के वेदपाठी ब्राह्मण इस गोपनीय व पवित्र विधान को अत्यंत विधि-विधान से संपन्न करवाते हैं।
शास्त्रोक्त वैदिक पूजा विधि
उज्जैन के पावन तीर्थ पर प्रत्येक अनुष्ठान संपूर्ण वैदिक शुचिता एवं मर्यादा से संपन्न होता है।
मंडप प्रवेश व गणेश पूजन
पवित्र वेदी पर वर अथवा कन्या का स्वागत एवं निर्विघ्नता हेतु गणेश पूजन।
अर्क / कुंभ प्रतिष्ठा
अर्क पौधे अथवा विष्णु स्वरूप कुंभ की विधिवत वेदोक्त प्राण प्रतिष्ठा।
वरमाला एवं सप्तपदी फेरे
पारंपरिक विवाह की भांति वरमाला अर्पण, गांठ जोड़ना एवं 7 फेरे लेना।
मंगल हवन व सिंदूरदान
अग्नि साक्षी में मंगल आहुतियां एवं शास्त्रसम्मत मंगल विसर्जन।
कुंभ विसर्जन / अर्क शांति
कलश का क्षिप्रा में वैदिक मंत्रों के साथ विसर्जन कर दोष मुक्ति की प्रार्थना।
पूजा पैकेज एवं दक्षिणा विवरण
सभी पैकेजों में संपूर्ण पूजन सामग्री, वैदिक विद्वान पंडित जी की दक्षिणा एवं व्यवस्था सम्मिलित है। कोई अतिरिक्त या छिपा हुआ शुल्क नहीं है।
एकल अर्क/कुंभ विवाह
- यजमान का व्यक्तिगत संकल्प
- कलश अथवा अर्क की प्राण प्रतिष्ठा
- पारंपरिक विवाह संस्कार एवं 7 फेरे
- हवन एवं विसर्जन
विशिष्ट कुंभ/अर्क अनुष्ठान (Recommended)
- विष्णु प्रतिमा पूजन एवं विशेष कुंभ वेदी
- मांगलिक दोष शांति हेतु विशेष मंत्र जाप
- संपूर्ण विवाह सामग्री एवं श्रृंगार सामान सम्मिलित
- दंपति की सुखी वैवाहिक जीवन हेतु दीर्घायु आशीर्वाद
- विवाह प्रमाणपत्र व संकल्प रसीद
पूजा की तैयारी एवं वस्त्र नियम
वैदिक पूजा में शुचिता एवं नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
विवाह के पारंपरिक वस्त्र: पीला अथवा सफेद कुर्ता-धोती
विवाह की साड़ी: लाल, पीली अथवा संतरी (काला व सफेद वर्जित)
शुभ मुहूर्त एवं श्रेष्ठ तिथियां
शास्त्रीय मान्यता अनुसार इन पावन तिथियों पर यह अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कुंभ विवाह के बारे में किसी को बताना आवश्यक है?
यह एक विशुद्ध धार्मिक एवं आध्यात्मिक दोष निवारण प्रक्रिया है। इसे परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में अत्यंत सादगी एवं मर्यादा से किया जाता है। किसी सामाजिक दिखावे की आवश्यकता नहीं होती।
शुभ मुहूर्त में अपने नाम एवं गोत्र से संकल्प करवाएं
पंडित जी से सीधे बात कर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएं और उपयुक्त तिथि सुनिश्चित करें।