मंगल दोष एवं भात पूजा उज्जैन
मंगल ग्रह की जन्मस्थली श्री अंगारेश्वर महादेव पर शास्त्रोक्त भात पूजन

श्री अंगारेश्वर महादेव, उज्जैन
पूजा का शास्त्रोक्त स्वरूप एवं महत्व
विवाह में आ रही अड़चनों, दांपत्य जीवन के तनाव अथवा भूमि-जायदाद से संबंधित परेशानियों के निवारण हेतु अंगारेश्वर मंदिर में भात पूजा सर्वोत्तम मानी गई है। अनुभवी वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रसम्मत विधि संपन्न की जाती है।
मंगल अग्नि तत्व प्रधान ग्रह हैं। शिवलिंग पर भात (चावल), दही, एवं कुमकुम का लेप कर उनका अभिषेक किया जाता है, जिससे मंगल का उग्र स्वभाव शांत होकर शुभ फल प्रदान करता है।
उज्जैन तीर्थ में ही क्यों?
स्कंद पुराण एवं मत्स्य पुराण में उज्जैन के अंगारेश्वर को मंगल ग्रह की जन्मभूमि माना गया है। संपूर्ण विश्व में केवल उज्जैन में ही यह अद्वितीय भात पूजा होती है।
शास्त्रोक्त वैदिक पूजा विधि
उज्जैन के पावन तीर्थ पर प्रत्येक अनुष्ठान संपूर्ण वैदिक शुचिता एवं मर्यादा से संपन्न होता है।
गणेश पूजन व नवग्रह स्मरण
कार्य की निर्विघ्नता हेतु प्रथम पूज्य भगवान गणेश एवं नवग्रहों का आह्वान।
नाम व गोत्र संकल्प
यजमान अथवा वर-वधू के नाम, गोत्र और कुंडली का उच्चारण कर संकल्प।
पंचामृत अभिषेक
दूध, दही, घी, शहद व शर्करा से अंगारेश्वर महादेव का पवित्र अभिषेक।
पवित्र भात अर्पण (चावल लेपन)
शीतल पके हुए चावलों से शिवलिंग का दिव्य श्रृंगार एवं कुमकुम लेपन।
मंगल बीज मंत्र जाप
वेदपाठी पंडितों द्वारा 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' का सस्वर जाप।
हवन एवं मंगल आरती
खैर की समिधा व लाल पुष्पों से हवन तथा मंगल देव की महाआरती।
पूजा पैकेज एवं दक्षिणा विवरण
सभी पैकेजों में संपूर्ण पूजन सामग्री, वैदिक विद्वान पंडित जी की दक्षिणा एवं व्यवस्था सम्मिलित है। कोई अतिरिक्त या छिपा हुआ शुल्क नहीं है।
सामान्य मंगल पूजा
- अंगारेश्वर मंदिर में संकल्प
- पंचामृत अभिषेक एवं भात अर्पण
- मंगल गायत्री पाठ
- हवन एवं महाआरती
विशेष भात पूजा एवं जप (Recommended)
- विस्तृत कुंडली विश्लेषण एवं दोष की तीव्रता का परीक्षण
- संपूर्ण भात पूजन, दही एवं कुमकुम श्रृंगार
- 10,000 मंगल बीज मंत्रों का सस्वर जाप
- विशेष खैर की लकड़ी एवं लाल चंदन की आहुति
- अंगारेश्वर का सिद्ध रक्षासूत्र एवं प्रसाद
महा मंगल शांति अनुष्ठान
- अंगारेश्वर तीर्थों का विशेष स्मरण
- 21,000 संपूर्ण वैदिक मंत्र जाप
- नवग्रह मंडल एवं रुद्राभिषेक
- दोष निवारण हेतु विशेष आहुतियां
- लाइव वीडियो कॉल एवं कूरियर द्वारा प्रसाद सुविधा
पूजा की तैयारी एवं वस्त्र नियम
वैदिक पूजा में शुचिता एवं नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
धोती-कुर्ता (लाल, पीला अथवा नारंगी)
साड़ी अथवा सलवार-सूट (लाल अथवा पीला)
शुभ मुहूर्त एवं श्रेष्ठ तिथियां
शास्त्रीय मान्यता अनुसार इन पावन तिथियों पर यह अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या भात पूजा केवल मंगलवार को ही की जाती है?
मंगलवार मंगल देव का दिन होने से अत्यंत शुभ माना जाता है। परंतु यदि किसी कारणवश मंगलवार उपलब्ध न हो, तो पंडित जी आपकी कुंडली के अनुसार किसी भी अन्य शुभ दिन अथवा शुक्ल पक्ष की तिथि पर यह विधान संपन्न करवा सकते हैं।
क्या वर और वधू दोनों को उपस्थित होना आवश्यक है?
जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष है, केवल उनका उपस्थित होना पर्याप्त है। यदि विवाह तय हो चुका है और दोनों मांगलिक हैं, तो दोनों संयुक्त रूप से संकल्प ले सकते हैं। यदि कोई उपस्थित न हो सके, तो ऑनलाइन संकल्प भी संभव है।
शुभ मुहूर्त में अपने नाम एवं गोत्र से संकल्प करवाएं
पंडित जी से सीधे बात कर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएं और उपयुक्त तिथि सुनिश्चित करें।