महामृत्युंजय जाप एवं अनुष्ठान उज्जैन
काल के स्वामी भगवान महाकालेश्वर के सानिध्य में स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं संकट मुक्ति हेतु महाअनुष्ठान

उज्जैन
पूजा का शास्त्रोक्त स्वरूप एवं महत्व
महाकाल की नगरी में इस अनुष्ठान की शक्ति अनंत गुना मानी गई है। पार्थिव शिवलिंग निर्माण, अखंड घृत दीप प्रज्वलन, रुद्राभिषेक एवं दशांश हवन के साथ संपूर्ण विधि पूर्ण की जाती है।
यह मंत्र शरीर की समस्त नाड़ियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और मानसिक व शारीरिक व्याधियों से मुक्ति प्रदान करता है।
उज्जैन तीर्थ में ही क्यों?
उज्जैन महाकाल का निवास है, जहां स्वयं शिव मृत्युंजय रूप में विराजमान हैं। यहां किया गया जाप सीधे भगवान महाकाल के चरणों में समर्पित होता है।
शास्त्रोक्त वैदिक पूजा विधि
उज्जैन के पावन तीर्थ पर प्रत्येक अनुष्ठान संपूर्ण वैदिक शुचिता एवं मर्यादा से संपन्न होता है।
प्रायश्चित्त व महासंकल्प
यजमान के नाम, गोत्र एवं रोग-कष्ट निवारण का स्पष्ट संकल्प।
पार्थिव शिवलिंग निर्माण व पूजन
क्षिप्रा की पावन मिट्टी से शिवलिंग निर्माण एवं प्राण प्रतिष्ठा।
अखंड मंत्र जाप
5 से 11 वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा 1,25,000 महामृत्युंजय मंत्र जाप।
दशांश महाहवन
गिलोय, दूर्वा, तिल, मधु, एवं औषधीय समिधा से रोग मुक्ति हवन।
महामृत्युंजय रक्षा कवच व भस्म
सिद्ध किया हुआ महामृत्युंजय यंत्र, रक्षा ताबीज व महाकाल भस्म प्रदान।
पूजा पैकेज एवं दक्षिणा विवरण
सभी पैकेजों में संपूर्ण पूजन सामग्री, वैदिक विद्वान पंडित जी की दक्षिणा एवं व्यवस्था सम्मिलित है। कोई अतिरिक्त या छिपा हुआ शुल्क नहीं है।
लघु महामृत्युंजय अनुष्ठान (11,000 जाप)
- व्यक्तिगत संकल्प एवं रुद्राभिषेक
- 11,000 सस्वर वैदिक मंत्र जाप
- हवन एवं महाआरती
- वीडियो कॉल दर्शन उपलब्ध
संपूर्ण सवा लाख महाअनुष्ठान (1,25,000 जाप)
- 5 ब्राह्मणों द्वारा प्रतिदिन 6 घंटे अखंड जाप
- प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग अभिषेक
- 12,500 आहुतियों का भव्य दशांश हवन
- रोग निवारक महामृत्युंजय यंत्र प्रतिष्ठित कर प्रेषित
- अस्पताल में भर्ती मरीजों हेतु विशेष दूरस्थ संकल्प
पूजा की तैयारी एवं वस्त्र नियम
वैदिक पूजा में शुचिता एवं नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
श्वेत अथवा पीला कुर्ता-पायजामा / धोती
पीली अथवा श्वेत साड़ी या सूट
शुभ मुहूर्त एवं श्रेष्ठ तिथियां
शास्त्रीय मान्यता अनुसार इन पावन तिथियों पर यह अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मरीज के स्थान पर परिवार का कोई अन्य सदस्य संकल्प ले सकता है?
हां, यदि व्यक्ति अस्वस्थ है अथवा अस्पताल में है, तो रक्त संबंधी (माता-पिता, पति-पत्नी, भाई अथवा संतान) उनके नाम और गोत्र का संकल्प लेकर यह अनुष्ठान करवा सकते हैं। इसका पूर्ण फल रोगी को ही प्राप्त होता है।
शुभ मुहूर्त में अपने नाम एवं गोत्र से संकल्प करवाएं
पंडित जी से सीधे बात कर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएं और उपयुक्त तिथि सुनिश्चित करें।