कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन
भगवान महाकाल की नगरी में क्षिप्रा तट पर 12 प्रकार के कालसर्प योग की शास्त्रोक्त शांति

रामघाट एवं सिद्ध शिव मंदिर, उज्जैन
पूजा का शास्त्रोक्त स्वरूप एवं महत्व
उज्जैन काल गणना का केंद्र एवं भगवान महाकाल की पावन स्थली है। क्षिप्रा नदी के पवित्र जल में स्नान, चांदी के नाग-नागिन का विधिवत पूजन, और आपके नाम-गोत्र से वैदिक आहुति द्वारा संपूर्ण विधान संपन्न किया जाता है।
ज्योतिष परंपरा के अनुसार कालसर्प दोष से जीवन में अप्रत्याशित विलंब, मानसिक अशांति, व्यापार में बाधाएं या विवाह में रुकावटें आ सकती हैं। शास्त्रसम्मत विधान से ग्रहों की ऊर्जा में संतुलन स्थापित होता है।
उज्जैन तीर्थ में ही क्यों?
उज्जैन कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर स्थित होने से ब्रह्मांडीय ऊर्जा का केंद्र है। महाकालेश्वर को काल का स्वामी माना जाता है, अतः राहु-केतु जनित कालसर्प शांति के लिए संपूर्ण भारत में यह सर्वोत्तम तीर्थ माना गया है।
12 प्रकार के कालसर्प योग एवं उनके प्रभाव
कुंडली में राहु और केतु की स्थिति के आधार पर 12 भिन्न योग बनते हैं। अपनी कुंडली अनुसार प्रकार चुनें:
अनंत कालसर्प योग
आत्मविश्वास में कमी, सिरदर्द, व्यक्तित्व संघर्ष और कार्यों में अनावश्यक विलंब।
महाकाल अभिषेक एवं राहु बीज मंत्र जप।
शास्त्रोक्त वैदिक पूजा विधि
उज्जैन के पावन तीर्थ पर प्रत्येक अनुष्ठान संपूर्ण वैदिक शुचिता एवं मर्यादा से संपन्न होता है।
क्षिप्रा स्नान एवं तर्पण
पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान कर यजमान के शरीर व मन की शुद्धि की जाती है।
नाम एवं गोत्र संकल्प
यजमान के नाम, गोत्र और कुल का उच्चारण कर पूजा का औपचारिक संकल्प लिया जाता है।
नाग-नागिन प्रतिष्ठा व पूजन
चांदी के नाग-नागिन जोड़े का दूध, गंध, पुष्प एवं अक्षत से अभिषेक व पूजन होता है।
राहु-केतु मंत्र जाप
वैदिक विद्वानों द्वारा राहु और केतु के वैदिक व बीज मंत्रों का सस्वर पाठ किया जाता है।
रुद्राभिषेक एवं महाहवन
भगवान शिव का पंचामृत अभिषेक और नवग्रह समिधा से पूर्णाहुति हवन संपन्न होता है।
आरती, प्रसाद एवं विसर्जन
महाआरती उपरांत नाग जोड़े का क्षिप्रा में सम्मानपूर्वक विसर्जन और प्रसाद वितरण।
पूजा पैकेज एवं दक्षिणा विवरण
सभी पैकेजों में संपूर्ण पूजन सामग्री, वैदिक विद्वान पंडित जी की दक्षिणा एवं व्यवस्था सम्मिलित है। कोई अतिरिक्त या छिपा हुआ शुल्क नहीं है।
मूल कालसर्प पूजा (Basic)
- व्यक्तिगत नाम व गोत्र संकल्प
- चांदी के नाग-नागिन जोड़े की प्रतिष्ठा
- क्षिप्रा तीर्थ पर पूजन सामग्री सम्मिलित
- नवग्रह एवं भगवान शिव का पूजन
- पूर्णाहुति हवन एवं प्रसाद
विशिष्ट कालसर्प पूजा (Standard)
- कुण्डली का विस्तृत परीक्षण एवं प्रकार की पहचान
- 2 वैदिक पंडितों द्वारा संयुक्त अनुष्ठान
- विशेष चांदी का नाग-नागिन जोड़ा एवं दूध अभिषेक
- 21,000 सस्वर वैदिक मंत्र जप
- क्षिप्रा तर्पण एवं विशेष हवन आहुति
- लाइव वीडियो कॉल दर्शन उपलब्ध (दूरस्थ भक्तों हेतु)
महा अनुष्ठान (Special Mahapujan)
- 4 वैदिक आचार्यों द्वारा सस्वर वेद पाठ
- 33,000 वैदिक व बीज मंत्रों का अखंड जाप
- पंचामृत से विशेष रुद्राभिषेक एवं महारुद्र पाठ
- विस्तृत नवग्रह एवं दिकपाल पूजन
- शुद्ध गाय के घी व जड़ी-बूटियों से वृहद हवन
- महाकाल भस्म, रक्षासूत्र व महाप्रसाद कूरियर द्वारा प्रेषित
पूजा की तैयारी एवं वस्त्र नियम
वैदिक पूजा में शुचिता एवं नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
धोती-कुर्ता अथवा सोला (सफेद या पीला)
साड़ी अथवा सलवार-सूट (पीला, लाल, संतरी)
शुभ मुहूर्त एवं श्रेष्ठ तिथियां
शास्त्रीय मान्यता अनुसार इन पावन तिथियों पर यह अनुष्ठान विशेष फलदायी होता है:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मुझे पूजा के लिए स्वयं उज्जैन आना अनिवार्य है?
यदि आप व्यक्तिगत रूप से आ सकते हैं तो यह अति उत्तम है। परंतु जो भक्त दूर अथवा विदेश में हैं, वे लाइव व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से संकल्प लेकर उपस्थित हो सकते हैं। संपूर्ण पूजा का सजीव प्रसारण किया जाता है तथा महाप्रसाद आपके पते पर भेज दिया जाता है।
पूजा के लिए कौन से वस्त्र पहनने चाहिए?
पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता अथवा सोला तथा महिलाओं के लिए साड़ी अथवा सलवार-सूट उत्तम है। पीले, सफेद अथवा हल्के रंग शुभ माने जाते हैं। काले अथवा गहरे हरे रंग के वस्त्र पूजा में कदापि न पहनें।
पूजा की दक्षिणा में क्या-क्या सामग्री शामिल है?
हमारी दक्षिणा पूर्णतः पारदर्शी है। इसमें चांदी का नाग-नागिन जोड़ा, हवन समिधा, गाय का शुद्ध घी, पंचामृत, फूल, फल, पंडित जी की दक्षिणा एवं मंदिर व्यवस्था शुल्क सम्मिलित हैं। कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं लिया जाता।
शुभ मुहूर्त में अपने नाम एवं गोत्र से संकल्प करवाएं
पंडित जी से सीधे बात कर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवाएं और उपयुक्त तिथि सुनिश्चित करें।